केंद्र सरकार द्वारा पारित होने वाले बजट से व्यापारियों को उम्मीद

ब्यूरो चीफ़-गौरव बाजपेयी
केंद्र सरकार द्वारा पेश किये जाने वाले बजट से हमें काफी उम्मीद है, करोना महामारी के बाद से व्यापारियों को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है, हमें उम्मीद है कि जीएसटी कर संरचना और इनकम टैक्स को सरल व तर्कसंगत बनाने के साथ ही व्यापारियों के लिए बजट में आर्थिक पॅकेज की व्यवस्था की जाएगी|
हमारे देश में लगभग 140 करोड़ लोगों में से 3% लोग ही टैक्स देते हैं इसलिए सरकार से मांग है कि टैक्स रेट ना बढ़ाएं बल्कि टैक्स देने वालों की संख्या में इजाफा करने के लिए उपयुक्त कदम उठाएं |
सरकार पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी में लाने की मांग को पूरा करें |
व्यापारियों ई कॉमर्स पॉलिसी लाने की मांग को पूरा करे |
हमारे देश में व्यापार पर लगने वाले विभिन्न प्रकार के लगभग 28 तरह के लाइसेंस के स्थान पर आधार की तरह एक लाइसेंस लागू करने की घोषणा हो |
मंडी शुल्क वापस लिया जाए |
सरकार को 5 करोड़ तक के सालाना कारोबार वाले डीलरों के लिए धारा 64 ए 364 और 1621 से संबंधित प्रावधानों को वापस लेना चाहिए |
एमएसएमई में डेली बेसिस पर लगने वाली पेनाल्टी में बंद की जाए |
5,00,000 की आय पर टैक्स नहीं है और 5,00,001 पर 12500 + 4% टैक्स कुछ तार्किक नहीं है इसका निदान होना चाहिए|
जीएसटी – रेवेन्यु बढ़ाने के लिए , व्यापार को आसान बनाने के लिए, इनपुट क्रेडिट को सीमलेस बनाने के लिए लाया गया था लेकिन इसको बना दिया गया है टैक्स चोरी रोकने का कर| एक परसेंट या उससे भी कम संख्या में पाए जाने वाली टैक्स चोर प्रजाति को पकड़ने के लिए सभी करदाताओं को झंझट में डालना व्यवहारिक कदम नहीं है | SeamlessITC के नाम पर जीएसटी कानून लाया गया था इसे जीएसटी की आत्मा बताया गया था लेकिन पहले धारा 17(5) , 16(4) के नाम पर फिर विभिन्न रूल लाकर और अब धारा 16(2)(aa) के माध्यम से जीएसटी की मूल आत्मा को ही मार दिया गया है| जीएसटी में रिटर्न का मकड़जाल खत्म हो, इमानदारी से टैक्स देने वालों को लेट फीस, ब्याज से मुक्ति प्रदान करें| जीएसटी के सरलीकरण की मांग भी अत्यंत पुरानी है जब से जीएसटी लागू हुआ है तब से व्यापारी सरलीकरण की मांग कर रहे हैं, हमें आशा है कि इस बार सरकार जीएसटी सरलीकरण के लिए उपयुक्त कदम उठाएगी|
जीएसटी रजिस्ट्रेशन का बिना किसी पूर्व सूचना के कैंसिलेशन करना व्यावहारिक नहीं है इसे दूर होनी चाहिए|
जीएसटी को सही में सरल करने का एक ही रास्ता है करदाता को जीएसटीआर 3b में रिवीजन का एक मौका मिलना चाहिए|
जीएसटी में रजिस्टर हुए व्यापारियों के लिए बिना गारंटी ऋण देने की स्कीम आनी चाहिए जिससे गत 2 वर्षों से नकदी की समस्या से पीड़ित व्यापारियों को लाभ मिल सके प्रक्रिया पूर्णता ऑनलाइन हो|
जीएसटी में अब तक लगभग 1000 नोटिफिकेशन आ चुके हैं किंतु आज तक एक भी नोटिफिकेशन gstr-3b में व्यापारियों को अपने रिटर्न में संशोधन का भी अधिकार मिलना चाहिए |
gstr-3b रिवाइज हो सके ऐसा सरकार को प्रावधान लाना चाहिए |
करदाताओं की आईटीसी रोक कर परेशान न किया जाए, किसी एक की गलती की सजा किसी अन्य को ना दी जाए |
जीएसटी पोर्टल में सर्विस प्रोवाइडर की गलती काबिले सुधार और व्यापारी की गलती गुनाह , ऊपर से ब्याज नहीं भरने पर अगले रिटर्न में वसूली और वसूली नोटिस में कोई धारा यह नियम का उल्लेख ही नहीं| सरकार को छूटा हुआ ब्याज लेना है तो छूटी हुई जायज आईटीसी भी लेने का डीलर को मौका मिलना चाहिए | बजट में इनकम टैक्स पोर्टल ठीक से काम नहीं कर रहा है तो सर्विस प्रोवाइडर को भी भारी पेनाल्टी से दंडित करने के लिए इनकम टैक्स एक्ट 1961 में एक नया सेकंड डाला जानाधन्यवाद

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