महिलाओं ने कुपोषण दूर करने का उठाया बीड़ा

सिधौली और कसमंडा ब्लॉक के छह  गांवों में बने किचन गार्डेन – विश्व महिला दिवस (8 मार्च) पर विशेष 
सीतापुर, 7 मार्च। सिधौली और कसमंडा विकास खंडों के छह गांवों की महिलाएं अब न तो खुद माड़-भात खाती हैं और न ही अपने बच्चों को खिलाती हैं । इन महिलाओं की खाने की थाली में अब हरी  सब्जियां भी शामिल हो रही हैं। गौरतलब  है कि इन महिलाओं को यह पौष्टिक और हरी-ताजी सब्जियां मुफ्त में मिल रहीं हैं। कुपोषण की समस्या को खत्म करने की और बच्चों व गर्भवती को पोषित बनाने का यह अभियान पार्टिसेपेटरी एक्शन फॉर कम्यूनिटी एंपारमेंट (पेस) संस्था द्वारा शुरू किया गया है। संस्था के युवा समूहों द्वारा जिले के विभिन्न गांवों में किचन गार्डेन स्थापित किए गए हैं,  जिनमें जैविक खाद से सब्जियां उगाई जा रहीं हैं। इन सब्जियों को अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों के साथ ही गर्भवती  को नियमित अंतराल पर पोषण आहार के रूप में मुफ्त में दिया जा रहा है। पेस संस्था की जिला समन्वयक  बीना पांडेय बताती हैं कि प्रत्येक युवा समूह में एक टीम लीडर के साथ ही 40 अन्य सदस्य भी हैं। खेतों की जुताई से लेकर सब्जियों की बोआई और उनका वितरण इसी टीम के जिम्मे है । वह कहती हैं कि प्रत्येक सब्जी के अपने गुण होते हैं। किसी में प्रोटीन तो किसी में विटामिन, कार्बोहाइड्रेट और मिनरल्स ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं। इसी को ध्यान में रखकर किचन गार्डेन में अलग-अलग सब्जियां उगाई जा रही हैं। इन सब्जियों को उगाने में किसी प्रकार की रासायनिक खादों का प्रयोग नहीं किया जाता है, जिससे यह सब्जियां अधिक लाभकारी हो जाती हैं। हर्रैया गांव के युवा समूह की लीडर तनुजा राज बताती हैं कि अति कुपोषित बच्चों को प्रत्येक सप्ताह में दो बार आधा-आधा किलो हरी सब्जियां दी जाती हैं। इसके अलावा कुपोषित बच्चों को सप्ताह में एक बार आधा किलो और गर्भवती  को सप्ताह में एक बार एक-एक किलो हरी सब्जी भेंट की जाती है। किचन गार्डेन में लगी है यह सब्जियां — मौजूदा समय में किचन गार्डेन में पालक, गाजर, मूली, तुलसी, पुदीना, सहजन, धनिया, गोभी, पत्ता गोभी, नींबू, अरबी, प्याज, लहसुन, लेमन ग्रास के साथ ही अमरूद, पपीता, अनार और एलोवेरा की भी खेती हो रही है। इन गांवों में हैं किचन गार्डेन — सिधौली ब्लॉक के मदारीपुर गांव में रूचि सिंह, काशीपुर गांव में सुनीता, बिजुआमऊ गांव में आकांक्षा और सहजनपुर गांव में स्नेह लता के नेतृत्व में तथा कसमंडा ब्लॉक के हर्रैया गांव में तनुजा राज और बिलरिया गांव में संगीता की देखरेख में किचन गार्डेन बनाए गए हैं। क्या कहती हैं टीम लीडर — मदारीपुर गांव के युवा समूह की लीडर रूचि सिंह बताती हैं कि कुपोषित बच्चों और गर्भवती  की जानकारी के लिए हम लोग आंगनबाड़ी केंद्रों पर जाते हैं, जहां से हमें इनके बारे में जानकारी मिलती है, जिसके बाद हम लोग इन बच्चों और महिलाओं को किचन गार्डेन की सब्जियां उपलब्ध कराते हैं। बिजुआमऊ गांव के युवा समूह की लीडर आकांक्षा मिश्रा कहती है कि किचन गार्डेन में उगने वाली सब्जियों के सेवन से बच्चों का वजन बढ़ रहा है और उनका कुपोषण भी कम हो रहा है। बोले एसीएमओ — एसीएमओ डॉ. पीके सिंह का कहना है कि फैमिली हेल्थ सर्वे 4 की रिपोर्ट के अनुसार जिले में 6 माह से 5 साल की उम्र के 52.6 प्रतिशत बच्चे खून की कमी (एनीमिया) के शिकार हैं। इसके अलावा 41.7 प्रतिशत गर्भवती भी रक्त अल्पता से जूझ रहीं हैं। ऐसे में इस तरह की पहल की बेहद जरूरत है। यह एक सराहनीय प्रयास है।

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